गंगा एक्सप्रेसवे बिजनौर: नया बवाल! छिनेगी ज़मीन, सड़क पर उतरे किसान, योगी सरकार को अल्टीमेटम

गंगा एक्सप्रेसवे बिजनौर: बिजनौर में कलेक्ट्रेट पर गंगा एक्सप्रेसवे के नए सर्वे रूट का विरोध करते और अपनी उपजाऊ ज़मीन बचाने के लिए प्रदर्शन करते 7 गांवों के आक्रोशित किसान।
ज़मीन छिनेगी? गंगा एक्सप्रेसवे बिजनौर का सर्वे शुरू होते ही बिजनौर के 7 गांवों के किसानों ने खोला मोर्चा, योगी सरकार को दिया अल्टीमेटम।

बिजनौर (Sansani News): जिस ‘गंगा एक्सप्रेसवे बिजनौर’ का सालों से सपना देख रहे थे, वही एक्सप्रेसवे अब हज़ारों किसानों की बर्बादी का फरमान लेकर आ गया है! एक्सप्रेसवे के निर्माण का काम अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुआ था कि बिजनौर में एक नया बवाल खड़ा हो गया है।

किसानों की उपजाऊ और बेशकीमती ज़मीनें अब सीधे खतरे में हैं। आक्रोशित किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर सीधा सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम अल्टीमेटम दे दिया है। अगर सरकार ने यह एक मांग नहीं मानी, तो हज़ारों किसान रातों-रात भूमिहीन (कंगाल) हो जाएंगे!

खुशी कैसे बदली खौफ में?

आपको बता दें कि लगभग एक हफ्ते पहले ही बिजनौर को यह खुशखबरी मिली थी कि अमरोहा से हरिद्वार जाने वाला गंगा एक्सप्रेसवे बिजनौर से होकर गुज़रेगा। भाकियू (BKU) नेता चौधरी दिगंबर सिंह और अन्य लोगों के कड़े संघर्ष के बाद यह जीत मिली थी। लेकिन अब प्रशासन द्वारा किए जा रहे सर्वे ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है।

प्रशासन जिन गांवों में गंगा एक्सप्रेसवे बिजनौर के लिए ज़मीन नाप रहा है, वह किसानों की सबसे उपजाऊ और महंगी ज़मीन है। किसानों का सीधा कहना है कि अगर यह ज़मीन अधिग्रहित (Acquire) हो गई, तो उनके बच्चों के मुंह से निवाला छिन जाएगा और वो सड़क पर आ जाएंगे।

किसानों की योगी सरकार से 1 सूत्रीय मांग!

सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे कई गांवों के प्रधानों और किसानों ने डीएम के माध्यम से सीएम योगी को ज्ञापन सौंपा। उनकी मांग बिल्कुल स्पष्ट है: “एक्सप्रेसवे को किसानों के खेतों से नहीं, बल्कि सीधा गंगा नदी के किनारे से निकाला जाए!”

गंगा किनारे से एक्सप्रेसवे निकालने के 3 बड़े फायदे (किसानों के अनुसार):

  1. मुफ्त सरकारी ज़मीन: गंगा किनारे सैकड़ों हेक्टेयर सरकारी ज़मीन खाली और बेकार पड़ी है (जैसे दारा नगर गंज, जहानाबाद, बालावाली, नांगल सोती से हरिद्वार तक)। सरकार को अधिग्रहण का भारी मुआवज़ा नहीं देना पड़ेगा।
  2. बाढ़ से पक्का बचाव: अगर एक्सप्रेसवे गंगा के बिल्कुल किनारे बनेगा, तो यह एक विशाल ‘तटबंध’ (Dam) का काम करेगा। इससे हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ से किसानों की फसलें हमेशा के लिए बच जाएंगी।
  3. किसानों की रोज़ी-रोटी बचेगी: हज़ारों हेक्टेयर उपजाऊ ज़मीन बर्बाद होने से बच जाएगी और किसान भूमिहीन होने से बच जाएंगे।

गंगा एक्सप्रेसवे के 594 किलोमीटर लंबे इस विशाल प्रोजेक्ट को लेकर सरकार बहुत गंभीर है। अगर आप इस एक्सप्रेसवे के पूरे रूट मैप, गांव-गांव के नक़्शे और ज़मीन अधिग्रहण के सरकारी मास्टर प्लान को बारीकी से समझना चाहते हैं, तो यूपीईडा (UPEIDA) के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर प्रोजेक्ट की विस्तृत पीडीएफ रिपोर्ट चेक कर सकते हैं।

गंगा एक्सप्रेसवे में ज़मीन छिनने के इस डर ने अन्नदाताओं को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहां सरकार यूपी गेहूं खरीद 2026 के तहत किसानों के खातों में 48 घंटे के अंदर सीधा पैसा भेजकर उन्हें सशक्त बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इस एक्सप्रेसवे के गलत रूट ने उन्हें रातों-रात कंगाल होने के खौफ में डाल दिया है।

🚨 इन गांवों की ज़मीन पर लटकी है तलवार (तुरंत चेक करें)

प्रशासन फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे के लिए मंडावर और चांदपुर के इलाकों में ज़ोर-शोर से सर्वे कर रहा है। जिन गांवों के किसानों में सबसे ज़्यादा खौफ और आक्रोश है, उनकी लिस्ट इस प्रकार है:

  • मिर्ज़ापुर पूरन
  • मोहम्मदपुर नवाब
  • इस्माइलपुर नंगली
  • चौकपुरी
  • नसीरी कछपुरा
  • नया गांव (अलीपुर माखन)
  • गजरौला अपचल

जिस तेज़ी से प्रशासन गंगा एक्सप्रेसवे के लिए इन गांवों में ज़मीन नापने का अभियान चला रहा है, उसे देखकर ग्रामीण दहशत में हैं। प्रशासन का यह सख्त रवैया बिल्कुल वैसा ही है जैसा हाल ही में लागू हुए राशन कार्ड नया नियम बिजनौर के दौरान देखने को मिला था, जहाँ ज़रा सी लापरवाही पर हज़ारों गरीबों के नाम लिस्ट से हमेशा के लिए साफ कर दिए गए।

क्या लटक जाएगा प्रोजेक्ट?

किसानों की इस चेतावनी ने साफ़ कर दिया है कि अगर सर्वे का रूट बदलकर गंगा किनारे नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह विरोध एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। ऐसे में ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ के निर्माण में और ज़्यादा देरी होने की पूरी आशंका है।

आपकी क्या राय है? क्या सरकार को किसानों की बात मानकर एक्सप्रेसवे गंगा किनारे से निकालना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट्स में दें और इस खबर को अपने सभी व्हाट्सएप ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें ताकि किसानों की आवाज़ सरकार तक पहुंच सके!

✍️ लेखक के बारे में:

अनवर हाशमी | मुख्य संपादक (Chief Editor) अनवर हाशमी डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में एक बेबाक और जाना-माना नाम हैं। ज़मीनी स्तर की खबरों, सरकारी योजनाओं की बारीकियों और आम जनता से जुड़े ‘सनसनीखेज़’ मुद्दों को निडरता से सामने लाने में इन्हें महारत हासिल है। इनका लक्ष्य सिर्फ आप तक खबर पहुंचाना नहीं है, बल्कि सिस्टम के हर उस नए नियम और बदलाव के लिए आपको ‘अलर्ट’ रखना है, जिसका सीधा असर आपकी जेब और ज़िंदगी पर पड़ता है।

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