
बिजनौर/हरदोई (Sansani News): उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) इन दिनों दो बिल्कुल अलग तस्वीरें पेश कर रहा है। एक तस्वीर में सत्ता का भारी जश्न है, तो दूसरी तस्वीर में हज़ारों किसानों की बर्बादी का खौफ!
देश के सबसे लंबे (594 किलोमीटर) प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे का काम पूरा होने की खुशी में 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदोई में इसका भव्य लोकार्पण करने जा रहे हैं। पीएम मोदी इस प्रोजेक्ट को लेकर कितने उत्सुक हैं, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सभास्थल पर भीड़ जुटाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी लगा दी गई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या 2600 बसों की भीड़ और हेलीकॉप्टरों के शोर में बिजनौर के किसानों की चीखें दब गई हैं?
लोकार्पण का ‘महा-उत्सव’: 2600 बसें, 5 हेलीपैड और करोड़ों की तैयारी
प्रमुख मीडिया संस्थान दैनिक भास्कर की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासनिक तैयारियों के तहत हरदोई के मल्लावां क्षेत्र (बंदीपुर और कल्याणपुर गांव) में पीएम मोदी की जनसभा के लिए ऐतिहासिक इंतज़ाम किए जा रहे हैं।
- भीड़ लाने के लिए हरदोई, उन्नाव, कन्नौज और शाहजहांपुर से कुल 2,600 विशेष बसें लगाई गई हैं।
- कार्यक्रम स्थल पर पीएम और वीवीआईपी मूवमेंट के लिए 5 हेलीपैड (3 ऊपर और 2 नीचे) रातों-रात तैयार किए जा रहे हैं।
- सीएम योगी आदित्यनाथ खुद 24 अप्रैल को तैयारियों का जायज़ा लेने पहुंचने वाले हैं।
लेकिन रुकिए! गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के इस जश्न के बीच एक डरावना सच भी है जो बिजनौर से सामने आ रहा है…
जश्न के पीछे का ‘अंधेरा’: बिजनौर में किसानों पर लटकी बर्बादी की तलवार!
जहां हरदोई में टेंट और पंडाल सज रहे हैं, वहीं बिजनौर में गंगा एक्सप्रेसवे का सर्वे हज़ारों किसानों की रातों की नींद उड़ा चुका है। बिजनौर के मंडावर और चांदपुर इलाके के 7 गांव (मिर्ज़ापुर पूरन, मोहम्मदपुर नवाब, इस्माइलपुर नंगली आदि) इस समय भारी दहशत में हैं।
प्रशासन गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के लिए यहां किसानों की सबसे उपजाऊ और बेशकीमती ज़मीन नाप रहा है। किसानों का सीधा कहना है कि अगर यह ज़मीन अधिग्रहित (Acquire) हो गई, तो उनके बच्चों के मुंह से निवाला छिन जाएगा और वो रातों-रात कंगाल होकर सड़क पर आ जाएंगे।
सीएम योगी को खुला अल्टीमेटम: “रूट बदलो वरना होगा महा-आंदोलन”
गुस्साए किसानों ने बिजनौर कलेक्ट्रेट पहुंचकर सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम सीधा ज्ञापन और अल्टीमेटम सौंप दिया है। किसानों की मांग बिल्कुल जायज़ और 1 सूत्रीय है: “गंगा एक्सप्रेसवे हमारे खेतों से नहीं, बल्कि सीधा नदी के किनारे पड़ी सरकारी ज़मीन से निकालो!”
गंगा किनारे से गंगा एक्सप्रेसवे निकालने के फायदे:
- मुफ्त सरकारी ज़मीन: नदी किनारे (दारा नगर गंज से हरिद्वार तक) सैकड़ों हेक्टेयर ज़मीन बेकार पड़ी है, सरकार को भारी मुआवज़ा नहीं देना पड़ेगा।
- बाढ़ से मुक्ति: यह एक विशाल ‘तटबंध’ (Dam) बनेगा, जिससे हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ रुक जाएगी।
- रोटी बचेगी: किसानों की उपजाऊ ज़मीन बच जाएगी।
क्या पीएम-सीएम को नहीं दिख रहा यह आंदोलन?
एक तरफ जहां सरकार यूपी गेहूं खरीद 2026 के तहत किसानों के खातों में 48 घंटे के अंदर सीधा पैसा भेजकर उन्हें सशक्त बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इस गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के ‘गलत रूट’ ने अन्नदाताओं को रातों-रात कंगाल होने के खौफ में डाल दिया है और सड़क पर उतरने पर मजबूर कर दिया है।
बिजनौर के किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार अपने जश्न में मगन रही और हमारी मांग नहीं मानी, तो गंगा एक्सप्रेसवे के खिलाफ एक ऐसा ‘महा-आंदोलन’ शुरू होगा, जो पूरे प्रोजेक्ट को रोक कर रख देगा।
आपकी क्या राय है? क्या भीड़ जुटाने के लिए 2600 बसें लगाने वाली सरकार को किसानों का दर्द नहीं दिख रहा? अपनी राय नीचे कमेंट्स में दें और इस खबर को अपने सभी व्हाट्सएप ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें ताकि किसानों की आवाज़ पीएम मोदी और सीएम योगी तक पहुंच सके!
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अनवर हाशमी | मुख्य संपादक (Chief Editor) अनवर हाशमी डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में एक बेबाक और जाना-माना नाम हैं। ज़मीनी स्तर की खबरों, सरकारी योजनाओं की बारीकियों और आम जनता से जुड़े ‘सनसनीखेज़’ मुद्दों को निडरता से सामने लाने में इन्हें महारत हासिल है। इनका लक्ष्य सिर्फ आप तक खबर पहुंचाना नहीं है, बल्कि सिस्टम के हर उस नए नियम और बदलाव के लिए आपको ‘अलर्ट’ रखना है, जिसका सीधा असर आपकी जेब और ज़िंदगी पर पड़ता है।
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